मुंह के अंदर छाला, सफेद या लाल निशान और किसी तरह की गांठ को अक्सर लोग मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर मुंह में बना घाव लंबे समय तक ठीक नहीं हो रहा है, तो इसकी जांच कराना जरूरी है। ये मुंह के कैंसर के लक्षण भी हो सकते हैं। ओरल कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें होंठ, जीभ, मसूड़े, गालों के अंदरूनी हिस्से और मुंह के अन्य भाग प्रभावित हो सकते हैं।
एम्स, नई दिल्ली की पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट डॉ. भारती पुरोहित ने भी मुंह के कैंसर के चेतावनी संकेतों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानकारी दी है। समय रहते बीमारी की पहचान होने पर इलाज के बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि मुंह में होने वाले हर छाले या गांठ को कैंसर न समझें, लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले बदलावों को अनदेखा भी न करें।
2 हफ्ते से ज्यादा मुंह में बना है छाला तो हो जाएं सावधान, डॉक्टर से जानिए मुंह के कैंसर के लक्षण, कारण और बचाव
मुंह का कैंसर क्या होता है?
मुंह का कैंसर, जिसे ओरल कैंसर भी कहा जाता है, तब होता है जब मुंह की कोशिकाएं असामान्य तरीके से बढ़ने लगती हैं और कैंसर का रूप ले लेती हैं। यह होंठ, जीभ, गालों के अंदरूनी हिस्से, मसूड़ों, मुंह के निचले हिस्से और तालू को प्रभावित कर सकता है।
कुछ मामलों में कैंसर आसपास के ऊतकों में फैल सकता है और शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंच सकता है। इसकी गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसर किस जगह है और बीमारी किस अवस्था में पहुंची है।
मुंह के कैंसर के लक्षण क्या हैं?
मुंह के कैंसर के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है। कई बार शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य छाले या मुंह की दूसरी समस्याओं जैसे दिखाई दे सकते हैं। इसलिए किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
मुंह के कैंसर के प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:
- लंबे समय तक ठीक न होने वाला छाला: मुंह में कोई घाव या छाला दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे, तो उसकी जांच कराएं।
- सफेद या लाल धब्बे: जीभ, गाल, मसूड़ों या मुंह के दूसरे हिस्सों में सफेद अथवा लाल रंग के धब्बे दिखाई देना चेतावनी संकेत हो सकता है।
- मुंह में गांठ या मोटापन: मुंह के अंदर किसी हिस्से में असामान्य गांठ, सूजन या मोटापन महसूस होना।
- मुंह खोलने में परेशानी: धीरे-धीरे मुंह कम खुलना या जबड़े को हिलाने में परेशानी होना।
- निगलने में दिक्कत: खाना या पानी निगलते समय दर्द अथवा परेशानी महसूस होना।
- लगातार दर्द या सुन्नपन: जीभ, होंठ या मुंह के किसी हिस्से में लगातार दर्द, जलन या सुन्नपन रहना।
- गर्दन में गांठ: गर्दन में बिना स्पष्ट कारण के गांठ या सूजन महसूस होना।
- आवाज में बदलाव: आवाज लगातार भारी होना या बोलने में परेशानी होना, खासकर जब इसके साथ अन्य लक्षण भी मौजूद हों।
- दांतों से जुड़ी परेशानी: बिना स्पष्ट कारण दांतों का हिलना या नकली दांतों का अचानक ठीक से फिट न होना।
ध्यान रखें कि ये लक्षण दूसरी बीमारियों या संक्रमण के कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर कैंसर की पुष्टि नहीं की जा सकती। अगर कोई बदलाव दो सप्ताह से ज्यादा बना रहता है, बढ़ रहा है या बार-बार हो रहा है, तो डेंटिस्ट या डॉक्टर से जांच कराएं।
मुंह का कैंसर होने के क्या कारण हैं?
मुंह के कैंसर के पीछे कई जोखिम कारक हो सकते हैं। इनमें तंबाकू और शराब का सेवन सबसे महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा कुछ वायरल संक्रमण और पर्यावरण से जुड़े कारण भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।
1. तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन
तंबाकू मुंह के कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी, जर्दा और चबाने वाले दूसरे तंबाकू उत्पादों का सेवन मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक तंबाकू का इस्तेमाल करने से कैंसर का खतरा बढ़ता है।
2. शराब का अधिक सेवन
लंबे समय तक अधिक मात्रा में शराब पीना भी ओरल कैंसर का जोखिम बढ़ाता है। जो लोग तंबाकू और शराब दोनों का सेवन करते हैं, उनमें खतरा और अधिक हो सकता है।
3. HPV संक्रमण
ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) का कुछ प्रकारों से संक्रमण कैंसर का कारण बन सकता है। खासकर HPV-16 का संबंध मुंह के पीछे के हिस्से और गले के कुछ कैंसर से है। हालांकि HPV से संक्रमित हर व्यक्ति को कैंसर नहीं होता।
4. धूप में लंबे समय तक रहना
जो लोग लंबे समय तक तेज धूप में काम करते हैं, उनमें होंठों के कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। सूरज की पराबैंगनी किरणें होंठों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
5. खानपान और ओरल हेल्थ
फल और सब्जियों से भरपूर संतुलित आहार लेना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। खराब ओरल हेल्थ और पोषण की कमी को भी मुंह की समस्याओं से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इन्हें अकेले ओरल कैंसर का सीधा कारण नहीं माना जा सकता।
मुंह के कैंसर से बचाव कैसे करें?
मुंह के कैंसर के सभी मामलों को रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आदतों में बदलाव करके इसके जोखिम को कम किया जा सकता है।
1. तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं
मुंह के कैंसर से बचने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका तंबाकू का सेवन बंद करना है। बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, खैनी और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाएं। अगर तंबाकू छोड़ने में परेशानी हो रही है, तो डॉक्टर या तंबाकू छोड़ने की सहायता देने वाली सेवाओं से मदद लें।
दूसरों के सिगरेट या बीड़ी के धुएं से भी बचने की कोशिश करें। घर और कार्यस्थल को धूम्रपान मुक्त रखना बेहतर है।
2. शराब का सेवन न करें या कम करें
शराब का सेवन ओरल कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है। इससे बचने के लिए शराब से दूरी बनाना सबसे सुरक्षित विकल्प है। तंबाकू के साथ शराब का सेवन करने से जोखिम और बढ़ सकता है।
3. HPV वैक्सीन के बारे में जानकारी लें
HPV वैक्सीन वायरस के उन प्रकारों से सुरक्षा देने में मदद करती है जो कुछ कैंसर का कारण बन सकते हैं। यह वैक्सीन मुख्य रूप से कम उम्र में लगाए जाने पर अधिक प्रभावी होती है। टीकाकरण की उम्र और पात्रता के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
4. मुंह की साफ-सफाई का ध्यान रखें
दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें और नियमित रूप से दांतों की जांच करवाएं। मुंह में कोई असामान्य घाव, धब्बा या गांठ दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज न करें।
5. पौष्टिक और संतुलित भोजन करें
अपने खाने में हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज और प्रोटीन से भरपूर चीजें शामिल करें। संतुलित आहार शरीर को जरूरी पोषक तत्व देता है और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है।
6. होंठों को तेज धूप से बचाएं
अगर आपका काम लंबे समय तक बाहर धूप में रहने का है, तो SPF युक्त लिप बाम का इस्तेमाल करें। जरूरत के अनुसार टोपी या अन्य सुरक्षात्मक कपड़ों से भी होंठों को तेज धूप से बचाएं।
मुंह में छाला या गांठ होने पर कब डॉक्टर को दिखाएं?
अगर मुंह में कोई छाला, सफेद या लाल धब्बा, गांठ या लगातार दर्द दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, तो डेंटिस्ट या डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। गर्दन में गांठ, निगलने में परेशानी, मुंह कम खुलना या बिना कारण दांत हिलने जैसे लक्षण हों तो भी जल्द चिकित्सा सलाह लें।
डॉक्टर मुंह की जांच करने के बाद जरूरत पड़ने पर बायोप्सी या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। बायोप्सी में प्रभावित हिस्से से ऊतक का छोटा नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है। इसी से कैंसर की पुष्टि की जा सकती है।
निष्कर्ष
मुंह का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, लेकिन समय रहते इसके संकेतों की पहचान और उचित इलाज बेहद महत्वपूर्ण हैं। मुंह में दो सप्ताह से अधिक समय तक रहने वाला छाला, सफेद या लाल धब्बा, गांठ और निगलने में परेशानी जैसे बदलावों को नजरअंदाज न करें। तंबाकू से दूरी, शराब से परहेज, HPV टीकाकरण के बारे में डॉक्टर से सलाह और नियमित ओरल जांच से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। याद रखें, मुंह में हर छाला कैंसर नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बने रहने वाले किसी भी असामान्य बदलाव की जांच जरूर करानी चाहिए।






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